Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
मनो हि पुरुषो नाम तं नियोज्य शुभे पथि ।
तज्जयैकान्तसाध्या हि सर्वा जगति भूतयः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कर्ता-अंश शुभ मार्ग में लगाया जाय, तो उपादानाश मे स्थित अणिमा आदि विभूतियाँ और
तत्त्वज्ञान भी वश में हो जाते है, ऐसा कहते है ।
मन ही पुरुष है, उसको शुभमार्ग में लगाकर एकमात्र उसकी जय से अवश्य प्राप्त होनेवाली जगत
में स्थित सब विभूतियाँ प्राप्त होती हैं