Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
मनो मोहे तु कर्तृ स्यात्कारणं च जगत्स्थितेः ।
विश्वरूपतयैवेदं तनोति मलिनं मनः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
व्यष्टिरूप से मन भ्रान्तिजनक है ओर समष्टिरूप से भान्ति के विषय जगत का उपादान है, ऐसा
भेद कहते है ।
मन भ्रान्ति का तो कर्ता है और जगत की स्थिति का कारण हे । समष्टिव्यष्टिरूप से मलिन मन ही
इस जगत का विस्तार करता हे