Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
यथा यथा यतन्ते ते जीवकाः स्वात्मसिद्धये ।
तथा तथा भवन्त्याशु विचित्रोपासनक्रमैः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
अथवा पुरुष के पूर्व जन्म के प्रयत्नरूप कर्म से सब व्यवस्थाओं की सिद्धि होती है, इस आशय से
कहते हैं।
वे जीव अपनी सिद्धि के लिए जैसे जैसे प्रयत्न करते हैं, शीघ्र ही विविध प्रकार की उपासना के क्रम
से वैसे ही हो जाते हैं