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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verses 33–34

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verses 33–34 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 33

संस्कृत श्लोक

दृश्यं च दृश्यते तेन द्रष्टा राम न दृश्यते । द्रष्टैव संभवत्येको नतु दृश्यमिहास्ति हि ॥ ३३ ॥ द्रष्टा सर्वात्मको दृश्ये स्थितश्चेत्कैव द्रष्टृता । सर्वशक्तिमता राज्ञा यद्यत्संपद्यते यथा ॥ ३४ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, दृश्य ही दिखाई देता है, द्रष्टा दिखाई नहीं देता । शंका : यदि द्रष्टा सर्वथा नहीं देखा जाता है, तो चित्त की पूर्वोक्त चिन्मात्र परिशेषरूप शुद्धि के लाभ से मोक्ष प्राप्ति कैसे होगी ? समाधान : केवल एक मात्र दरष्टा ही है, दृश्य तो यहाँ कुछ है ही नहीं । जो कुछ दिखाई देता है एकमात्र भ्रान्ति का विलास है । इसलिए चिन्मात्रपरिशेषरूप शुद्धि के लाभ से मोक्ष की प्राप्ति में कौन बाधा है ?