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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

रसस्य कारणं किं स्यादिति वक्तुं न युज्यते । ब्रह्मणः कारणं किं स्यादिति वक्तुं न युज्यते ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसा होने पर ब्रह्म का कारण क्या है, इस प्रकार की शंका का भी अवसर नहीं आता, ऐसा कहते हैं । जैसे रस का कारण क्या है, यह कहना उचित नहीं है, वैसे ही ब्रह्म का कारण क्या है, यह भी कहना युक्त नहीं है