Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

रसकारणकं बीजं फलभावेन जृम्भते । ब्रह्मकारणको जीवो जगद्रूपेण जृम्भते ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

जल के सम्पर्क से उक्त बीज की भी जैसे पुनः वृक्षभावापत्ति होती है, वैसे ही मुक्त की भी पुनः जीवभावापत्ति होगी, इस प्रकार यदि बीज को दृष्टान्त न मानों, तो रस ही दृष्टान्त है, ऐसा कहते हैं। रसकारणवाला बीज फल रूप से विकास को प्राप्त होता है और ब्रह्मकारणवाला जीव जगद्रूप से विकास को प्राप्त होता हे