Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चित्कलापदमासाद्य सुषुप्तान्तपदस्थितम् ।
बुद्धो निवर्तेते जीवो मूढः सर्गे प्रवर्तते ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार
तत्त्ववेत्ता पुरुष सुषुप्ति अवस्था के अवसानभूत तुरीय पद में, जो कि अपना स्वरूप है, स्थित
चैतन्यैकरसस्वभाव को ज्ञान से प्राप्त कर जीवभाव से निवृत्त होता है, किन्तु जो तत्त्वज्ञानी नहीं है वही
अपनी कल्पना से फिर देहादि की आकारकल्पनारूपसूष्डि मे प्रवृत्त होता हे