Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

एवमात्मनि जीवत्वे सत्यवस्थात्रयात्मनि । नचाम्भसीव वीचित्वमस्मिन्कचति देहता ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार जाग्रदादि तीन अवस्थारूप इस आत्मा में देहता जल मेँ लहर की तरह स्फुरित नहीं होती | भाव यह कि जैसे जल ही तरंग आदिरूप से प्रकट होता है, तत्त्वदर्शन होने पर तो जल से पृथक्‌ तरंग आदि कोई वस्तु नहीं हे, वैसे ही जीव ही तीन अवस्थावाला आत्मा है, ऐसा विचार होने पर जीव से अन्य देहता कोई वस्तु बाकी नहीं रहती