Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
सिद्धानध्यासितोत्तुङ्गशिलाशकलविष्टरान् ।
धृताकारानिवोत्साहान्हेलादृष्टजगत्त्रयान् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
ऊँचे शिलाखण्डरूपी आसन
पर बैठे हुए तथा लीला से तीनों जगतों को देखनेवाले सिद्धों को भी देखा जो शरीरधारी उत्साह के
तुल्य थे