Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verses 5–6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verses 5–6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 5,6
संस्कृत श्लोक
कृताजस्रपतत्पुष्पधारासारनिमज्जनान् ।
तालोत्तालकृतोद्धस्तहस्तान्हस्तिघटापतीन् ॥ ५ ॥
मदावलेपनिद्रालून्मदान्मूर्तानिव स्थितान् ।
पुष्पकेसररक्ताङ्गपवनारुणवालधीन् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिनमें निरन्तर फूल गिर रहे थे, ऐसे धारा के प्रवाहों में, जो नहा चुके थे तथा ताल वृक्ष
की तरह लम्बे, मोटे ओर ऊपर उठाये हुए सूँडवाले गज यूथपों को देखा, वे मद के आधिक्य के कारण
आलस्य से पकी ले रहे थे, मूर्तिधारी मद के तुल्य थे और फूलों के केसरों से रंजित पवन से उनकी
पछ लाल हो गई थी