Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
दृष्टाः कठिनसंरम्भा विभवोऽप्यर्जनभ्रमाः ।
विहृतं वीतशोकासु चिरं मेरुस्थलीषु च ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
आदि भी बीत गये हैं ॥ ३ ८॥ मैंने कठिन क्रोध और उद्योग से भरे हुए राजाओं को देखा, धनोपार्जनार्थ
विविध भ्रमणों का अनुभव किया तथा बहुत दिनों तक शोक से शून्य सुमेरूपर्वत की भूमियों में विहार
किया