Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
पीतमामोदि मन्दारकेसरारुणितं पयः ।
मन्दाकिन्याः सकह्लारं तटीष्वमरभूभृतः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
सुमेरुपर्वत के समीप की भूमियों में मन्दार के फूलों के केसरों से रंजित अतएव सुगन्धपूर्ण
तथा सन्ध्याकाल में खिलनेवाले कमलों से युक्त मन्दाकिनी के जल का मैंने पान किया