Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अथ कालभृगू देवौ मन्दराचलकन्दरात् ।
गन्तुं प्रवृत्ताववनौ समङ्गासरितस्तटम् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
चौदहवाँ सर्ग
समंगा नदी के किनारे पर जाकर काल और भृगु ऋषि का शुक्राचार्य को समाधि से जगाना,
पूर्वं वृत्तान्त का स्मरण दिलाना और वहाँ से आने की इच्छा का वर्णन ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, इसके अनन्तर काल और भृगु ये दोनों देवता मन्दराचल
की कन्दरा से पृथ्वीतल में उतरकर समंगा नदी के तट पर जाने के लिए तत्पर हुए