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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 50

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 50

संस्कृत श्लोक

आलोकयति चेत्सत्यं तदा सत्यमयीं मनः । शरीरभावनां त्यक्त्वा परामायाति निर्वृतिम् ॥ ५० ॥

हिन्दी अर्थ

मन की यह देह आदि कल्पना आत्म- साक्षात्कार तक ही होती है, उसके बाद नहीं होती, ऐसा कहते हैं। यदि मन सत्य तत्त्व का साक्षात्कार करता है, तो उस समय असत्य शरीर भावना का त्याग कर परम निवृत्ति को प्राप्त होता हे