Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verses 36–37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, verses 36–37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
तेन मागा मुने कोपमापदामीदृशः क्रमः ।
यद्यथा तत्तथैवाशु सत्यमालोकयाकुलः ॥ ३६ ॥
न वयं प्रतिभार्थेहा नाभिमानवशीकृताः ।
स्वतो हि तात वशगाः केवलं नियतौ स्थिताः ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिजी, पूर्वोक्त रीति से मेरे अपराध का संभव न
होने से आप व्याकुल होकर कोप न कीजिये। आपत्तियों का ऐसा ही क्रम है। जो जैसा है वह वैसा होकर
ही रहेगा, इसे आप सत्य समझिये