Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
मनो मिथ्याभ्रमाभोगे कर्तृताकर्तृतामयीम् ।
करोति कलनां रज्ज्वां भ्रान्तेक्षण इवाहिताम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे दूषित दृष्टिवाला पुरुष रस्सी में सर्पत्व की कल्पना करता है वैसे ही मन ने मिथ्याभ्रम में कर्तृत्व
और अकर्तृत्व रूप कल्पना कर रक्खी है