Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 98, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 98, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 98 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
क्षणमात्रेण तत्रासावुपसंहृत्य रोदनम् ।
स्वान्यङ्गानि समालोक्य जहास च ननाद च ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
एक क्षण में वहाँ पर
रोना समाप्त कर वह अपने अंगों को देखकर हँसने और गरजने लगा