Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 98, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 98, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 98 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
इति पृष्टेन कथितं तेन मे रघुनन्दन ।
नाहं कश्चिन्न चैवेदं मुने किंचित्करोम्यहम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरघुनन्दन, मेरे यों पूछने पर उसने कहा : हे मुनिजी, मैं कोई नहीं हूँ और मैं यह कुछ
भी नहीं करता हूँ