Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
सर्वभूतहितः श्रेष्ठो यः कालकलनात्मकः ।
येनेदमाततं सर्वं चित्ताकाशः स उच्यते ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्ताकाश का लक्षण कहते हैं।
जो सब व्यवहारो का हेतु होने से सब प्राणियों का हितकारी है, जो सब कार्य और कारणों
का नियन्ता होने से श्रेष्ठ हे, जो काल का विभाग करनेवाला है एवं जिसने अपनी कल्पना से
इस सकल जगत् का विस्तार कर रक्खा है, वह चित्ताकाश कहा जाता हे