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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 16

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 16

संस्कृत श्लोक

सबाह्याभ्यन्तरस्थो यः सत्तासत्तावबोधकः । व्यापी समस्तभूतानां चिदाकाशः स उच्यते ॥ १६ ॥

हिन्दी अर्थ

तीनों आकाश जब एक ही सत्तावाले है, तो चिदाकाशमें क्या विशिष्टता है ? ऐसी स्वयं आशंका कर उसकी विशिष्टता दशति हृए चिदाकाश को मायाशवल दशति हैं। जो आभ्यन्तर बुद्धि आदि और बाह्य घट-पट आदि वस्तुओं की उत्पत्ति ओर विनाशका साक्षी तथा बाहर और भीतर स्थित सब वस्तुओं का व्यापक है, वह चिदाकाश कहा जाता है