Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
न चेतनं न च जडं यदिदं प्रोत्थितं मनः ।
विचित्रसुखदुःखेहं जगदभ्युदितं तदा ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
जो यह मन पूर्वोक्त रीति से उत्पन्न हुआ, तत्त्वज्ञ लोग उसे न
तो चेतन है और न जड़ है, ऐसा जानते हैं । उससे विविध सुख, दुःख ओर चेष्टाओं से पूर्ण यह
जगत् उत्पन्न हुआ है