Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 62

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 62 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

एकरूपे हि मनसि संसारः प्रविलीयते । उपाविलं कारणं तैर्भ्रान्त्या जगदुपस्थितम् ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

मन के अद्वितीय ब्रह्माकार होने पर संसार का विलय हो जाता है। कलुष जल के सदुश मलिन चिद्रूप मन संसार का कारण हे । मलिन चिद्रूप मनों से (समष्टिभूत मनरूप हेतुओं से) भ्रान्तिवश जगत्‌ उत्पन्न हुआ है