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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

तज्जडानां परं विद्धि जडं येनोच्यते मनः । न चावगच्छति जडं मनो यस्य हि चेतनम् ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

अतएव वादियों को अपनी-अपनी वासना के अनुसार मनमें जाड्य और चैतन्य का अनुभव उत्पन्न होता है ऐसा कहते हैं। हे श्रीरामजी, जो मनको जड़ कहता है, उसके मनको आप जड़ोंमें सर्वोच्च जड़ समझिये, जिसका मन चेतन है, वह मनको जड़ नहीं जानता है । यानी जो मनको चेतन जानता है उसका मन जड़ नहीं है