Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 21

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

यदा स्पन्दैकधर्मत्वात्कर्तुर्या शून्यशंसिनी । आधावति स्पन्दफलं तदा कर्मेत्युदाहृता ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

चूँकि कर्ता एकमात्र स्पन्दधर्म से युक्त होता है, अतः जब उक्त शुद्ध चेतन ही वास्तवमें असत्‌ स्पन्दरूप गुण से कर्ता को गुणी करता है, ओर स्पन्द के फल का (शरीर और उसके अवयवो का अन्य देश में संयोग का) सम्पादन करने के लिए दौड़ता-सा है, तब कर्म कहा जाता है