Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
इदं त्यक्त्वेदमायाति बालवत्पेलवा यदा ।
विचारं संपरित्यज्य तदा सा चित्तमुच्यते ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जब वह शुद्ध चेतन पूर्वापर के अनुसन्धानका त्यागकर बालक की नाई एक विषय का
त्यागकर दूसरे विषयका स्मरण करता है, तब “चित्त” नाम से कहा जाता है