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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 22

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

काकतालीययोगेन त्यक्त्वैकघननिश्चयम् । यदेहितं कल्पयति भावं तेनेह कल्पना ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

काकतालीय न्याय से (अकस्मात्‌) अन्य वस्तु के लिए अवकाश से रहित अपने स्वरूप के ज्ञानका त्याग कर यानी अपनी पूर्णता को भूलकर जब अपनी इच्छित परिच्छिन्नताकी कल्पना करता है, तब कल्पना नाम से प्रसिद्ध होता है