Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
भवैः कतिपयैर्मोक्षमित्युक्ता गुणपीवरी ।
तादृक्फलप्रदानैककार्याकार्यानुमानदा ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
तीसरी जीवजाति को कहते है ।
हे श्रीरामचन्द्रजी, विविध प्रकार के सुख-दुःखरूपी फलों के प्रदानरूपी मुख्य हेतुओं से
पूर्वकल्प के पुण्य ओर पापका अनुमान करानेवाली जो जीवजाति है, उसको बुद्धिमान् पुरूष
"ससत्त्व" कहते हे । वह भी क्रम से सत्त्वगुणकी वृद्धि होने पर लगभग सौ जन्मों में मोक्षभागिनी
होती है, यह अर्थात् प्रतीत होता है