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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verses 5–6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, verses 5–6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 5,6

संस्कृत श्लोक

तेन राम ससत्त्वेति प्रोच्यते सा कृतात्मभिः । अथ चेच्चित्रसंसारवासनाव्यवहारिणी ॥ ५ ॥ अत्यन्तकलुषा जन्मसहस्रैर्ज्ञानभागिनी । तादृक्फलप्रदानैकधर्माधर्मानुमानदा ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

चौथी जीवजाति को कहते है। जो जीवजाति विचित्र संसारकी वासनाओं से युक्त हो, अत्यन्त कलुषित यानी पूर्वकल्प में संचित अत्यधिक दुष्कर्म ओर दुर्वासनाओंसे मलिन हो ओर भाँति-भाँति के भले और बुरे फलों के प्रदानरूप हेतुओं से पूर्वकल्प के धर्म ओर अधर्म का अनुमान कराती है, इस कारण उसे सज्जन पुरुष “अधमसतत्वा' कहते हैं