Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 94, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 94 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
तत्तादृशी हि सा तज्ज्ञैः प्रोक्ता राजसराजसी ।
सैव जन्मशतैर्मोक्षभागिनी चेच्चिरैषिणी ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
नर्वीं जीवजाति को दशति है।
वही यदि चिरकाल की अभिलाषावाली होने से सैकड़ों जन्मों से मोक्षभागिनी हो और वैसे
ही यानी राजस, तामस फलको देनेवाले उपासना आदि कर्मका आरम्भ करनेवाली हो, तो
उस जीवजाति को सज्जनो में राजसतामसी कहा हे