Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verses 23–24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, verses 23–24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 23,24
संस्कृत श्लोक
इन्दुपुत्रैर्नरैरेव पुरुषाध्यवसायतः ।
ध्यानेन ब्रह्मता प्राप्ता सा मयापि न खण्ड्यते ॥ २३ ॥
अन्येऽपि सावधाना ये धीराः सुरमहर्षयः ।
चित्तात्स्वमनुसंधानं न त्यजन्ति मनागपि ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
मनुष्य होते हुए भी इन्दु के पुत्रोने पुरुषोद्योगसे
(पौरूषसे) ध्यान द्वारा ब्रह्मता (ब्रह्मा का पद) प्राप्त की । उनकी ब्रह्मता का मैं भी खंडन नहीं
कर सकता। ओर भी जो सावधान धीर देवता, महर्षि है, वे चित्त से अपनी उपासना का तनिक
भी त्याग नहीं करते हैं