Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
आधयो व्याधयश्चैव शापाः पापदृशस्तथा ।
न खण्डयन्ति तच्चित्तं पद्मघाताः शिलामिव ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे कमलों की चोट पत्थर को नहीं तोड़ सकती वैसे ही
मानसिक व्यथाएँ, शाप ओर पापदृष्टिवाले राक्षस, पिशाच आदि अपने ध्येय पदार्थ में एकाग्र
चित्त का तिरस्कार नहीं कर सकते