Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 18
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
पतत्वम्भसि वह्नौ वा कर्दमे वा शरीरकम् ।
मनो यदनुसंधत्ते तदेवाप्नोति तत्क्षणात् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीर जल में, अग्नि में, चाहे कीचड़ में गिर पडे, किन्तु मन जिसका ध्यान करता है,
तुरन्त उसीको प्राप्त होता है