Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
पवित्रमनुसंधानं चेतः स्मरति सर्वदा ।
निष्फलास्तत्र शापाद्याः शिलायामिव सायकाः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
विषयदोष से मन दूषित होता है, अन्य दोष से नहीं, ऐसा कहते हैं।
चित्त सदा पवित्र विचार का स्मरण करता है, इसलिए जैसे पत्थरमें बाण निष्फल होते हैं
वैसे ही उसमें शाप आदि निष्फल हैं