Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 92, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
पुरुषातिशयः सर्वः सर्वभावोपमर्दने ।
ददात्यविघ्नेन फलं मनो हि मनसो मुने ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण देह आदि भावों का विनाश होने पर भी प्रयत्न
समृद्ध होकर बिना किसी प्रकार की विघ्नबाधा के फल देता है । वह जो देता है वह मन ही
मनका फल देता है, क्योकि पौरुष भी तो मन से अभिन्न हे