Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
नाहं न चान्यदस्तीह चित्रं चित्तमिदं स्थितम् ।
वसिष्ठैन्दवसंविद्वदसत्सत्तामिवागतम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे वसिष्ठजी, इस प्रकार तन्तुओं से पट की तरह किसीकी
भी देह चित्त से पृथक् नहीं हे । न मैं हूँ, न अन्य है, यह सब विचित्र चित्त ही स्थित हे । ऐन्दवों
की संवित् के समान असत् ही चित्त सत्ता को प्राप्त हो गया हे