Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
कथ्यते जीवनाम्नैतच्चित्तं प्रतनुवासनम् ।
शान्तदेहचमत्कारं जीवं विद्धि क्रमात्परम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
सूक्ष्म वासनावाला यह चित्त जीव
कहलाता है ओर स्थूलताभ्रम से युक्त यह चित्त देह कहलाता है, इस भेद के क्रम से जिसमें
तीनों देहो का (कारण, सूक्ष्म तथा स्थूल देहो का) चमत्कार विनष्ट हो गया, उस जीवको
आप परब्रह्म ही समझिए