Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 91, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
तदेतच्चित्तवद्भातमातिवाहिकनामकम् ।
तदेवोदाहरन्त्येवं देहनाम्ना घनभ्रमम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए सब लोग मैं देवता हूँ, मैं मनुष्य हूँ इत्यादि देह के नाम से अपने को कहते हैं,
एकरूप से नहीं कहते हैं, ऐसा कहते हैं।
इसलिए चित्त के समान प्रतीत आतिवाहिक सूक्ष्म देह को ही स्थूलता की भ्रान्ति से युक्त
होने पर लोग तत्-तत् देह के नाम से कहते हैं