Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 90, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 90, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
पापानुरूपमस्याशु शापं देहि महामुने ।
यदवध्यवधात्पापं वध्यत्यागात्तदेव हि ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
राजा ने कहा : हे भगवन्,
आप सम्पूर्ण धर्म के मर्म को जाननेवाले है । में मेरी पत्नीका अपहरण करनेवाले इस दुरात्माके
मुख में अत्यन्त घृष्टता देखता हूँ २॥ हे महामुने, आप इसके पाप के अनुरूप इसे शीघ्र शाप
दीजिए, क्योकि यदि इसको दण्ड न दिया जाय, तो मारने योग्य पुरष के त्याग से वही पाप
होता हे, जो कि अवध्य के वध से होता है, इसलिए इसे दण्ड देना आवश्यक हे