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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 90, Verses 1–2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 90, verses 1–2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

भानुरुवाच । अथेन्द्रेणैवमुक्तोऽसौ राजा राजीवलोचनः । मुनिं भरतनामानं पार्श्वसंस्थमुवाच ह ॥ १ ॥ राजोवाच । भगवन्सर्वधर्मज्ञ पश्यामि सुदुरात्मनः । भृशमस्य मुखे स्फारं धार्ष्ट्यं मद्दारहारिणः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

भानु ने कहा : हे ब्रह्मन्‌, तदनन्तर इन्द्रनामक विट के ऐसा कहनेपर कमल के तुल्य नेत्रवाले उस राजा ने समीपमें स्थित भरत नाम के ऋषिजी से कहा

सर्ग सन्दर्भ

नवासीवाँ सर्ग समाप्त नब्बेवाँ सर्ग भरतमुनि के शाप से उनके देहों के नष्ट होने पर भी उनके मनक तन्मयता नष्ट न हुई, यह वर्णन ।