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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

शासनेषु च यत्सङ्गो निःशङ्कस्तेन हर्षितौ । मुह्यावो न महीपाल स्वाङ्गैरपि विकर्तितैः ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

चूँकि हम लोगों का संग यानी मन का सम्बन्ध निःशंक है यानी पृथक्‌ होने की शंका से रहित है, इसलिए हे राजन्‌, आपके द्वारा किये गये उत्पीड़न आदि दण्डो मे अंगों के छेदन से भी हम लोग हर्षित रहते हें, खिन्न नहीं होते ।