Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
मृणालभारकदलीपल्लवास्तरणेषु सा ।
अतप्यत भृशं बाला लता लूना वनेष्विव ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह बाला कमलनालों के समूह तथा केले के
पल्लवो के बिछौने पर वनमें जैसे कटी हुई लता सन्तप्त होती है, वैसे ही अत्यन्त सन्तप्त
होती थी