Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
खेदमाप समग्रासु तासु भूपविभूतिषु ।
मत्सी निदाघतप्तासु परिलोला स्थलीष्विव ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जसे ग्रीष्म ऋतुमें सन्तप्त वनभूमि में मछली तड़पती है वैसे ही सकल
राजसम्पत्तियों में उसे खेद होता था यानी सम्पूर्ण राजविभूतियाँ उसको भली नहीं लगती
थी