Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 89, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
आकर्ण्यैवमहल्या सा बभूवेन्द्रानुरागिणी ।
अहल्यां मां स नो कस्मात्सक्तोऽभ्येतीत्यथोत्सुका ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा सुनकर अहल्यानामक राजा की पत्नी इन्द्रनामक
विटपर अनुरागिणी हुई । तदनन्तर मुझपर आसक्त वह इन्द्र मुझ अहल्या के पास क्यों नहीं
आता इस प्रकार वह उत्कण्ठित हुई