Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
बहुगर्तविभागस्थभूता लोकाः पृथक्पृथक् ।
जातारुणा विलोक्यन्तेदाडिमानीवकान्तिकाः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
भुवनरूपी
गर्तो में स्थित बहुत से प्राणी जिनमें बीजके (दाडिमदबीजके) तुल्य हैं, ऐसे लोक (ब्रह्माण्ड),
जो तेजोयुक्त होकर प्रकाशित हो रहे हैं, दाडिमों की तरह दिखाई देते हैं