Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 85, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
त्रिप्रवाहा त्रिपथगा कृतोर्ध्वाधोगमागमा ।
जगद्यज्ञोपवीताभा स्फुरतीन्दुकलामला ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
तीन
प्रवाहोवाली ऊर्ध्वं लोक में और अधोलोक में गमन ओर आगमन करनेवाली गंगा नदी, जो
कि चन्द्रमा की कला के समान निर्मल है, जगत् के यज्ञोपवीत के समान स्फुरित होती
है