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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, Verse 44

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 84, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

यथात्मा दृश्यतामेति द्वित्वैक्यभ्रमदायिनीम् । श्रृणु तत्ते प्रवक्ष्यामि वक्ष्यमाणकथागमैः ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार शुद्धात्मा ही चित्तभाव द्वारा दृश्यभाव को प्राप्त-सा हुआ है, यह फलित अर्थ निकला। उक्त फलितार्थ की पुष्टि के लिए आगे कही जानेवाली कथाकी अवतरणिका देते हैं । जिस प्रकार आत्मा द्वैत ओर एकत्वभ्रम करनेवाली दृश्यताको प्राप्त होता है, उसे आप सुनिये, मैं वक्ष्यमाण (कही जानेवाली) कथा द्वारा उसे कहता हूँ