Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 82, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्त्वा राक्षसी तत्र संपन्ना सुविलासिनी ।
हारकेयूरकटकपट्टस्रग्दामधारिणी ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
वसिष्ठजी ने कहा : हे रामचन्द्रजी, एेसा कहकर वह राक्षसी वहाँ पर सुन्दर
स्त्री बन गई । उसने हार, बाजूबन्द, कड़े, रेशमी वस्त्र ओर सुन्दर मालाएँ धारण कर ली