Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 78
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 78 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 78
संस्कृत श्लोक
यथा न जलभूम्यादेः पृथक्किंचिन्मनागपि ।
तथैतस्मात्स्वभावाणोर्न किंचित्पृथगस्ति हि ॥ ७८ ॥
हिन्दी अर्थ
किससे कोई पृथक् नहीं है ? इस प्रश्न का उत्तर देते हैं।
जैसे जल, भूमि आदि पाँचभूतों से भौतिक पदार्थ तनिक भी पृथक् नहीं हैं, वैसे ही इस
स्वभावरूप अणुसे कुछ भी पृथक् नहीं है