Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 79
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 79 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 79
संस्कृत श्लोक
सर्वगानुभवात्मत्वात्सर्वानुभवरूपतः ।
एकत्वानुभवन्याये रूढे सर्वैकतास्य हि ॥ ७९ ॥
हिन्दी अर्थ
दृश्य की अपृथकता का युक्ति से भी अनुभव कराते हैं।
सर्वगामी अनुभवरूप होने से और सबका अनुभवरूप होने से एकत्व के अनुभव का न्याय
जब दृढ़ हो जाता है तब इसकी सबके साथ एकता सिद्ध है