Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, Verse 53
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 81, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
चिति भूतानि भूतानि वर्तमानानि संप्रति ।
भविष्यन्ति च भूतानि सन्ति बीजे द्रुमा इव ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
सृष्टि के समय जिनकी बीजपरम्परा की अवधि अव्यक्त है, ऐसे सब बीज सृष्टि के समय
जगद्गूप से विकसित होकर किसमें अनुस्यूत हैं ? इस प्रश्न का उत्तर देते हैं।
जैसे बीज में वृक्ष रहते हैं, वैसे ही चित् में अतीत, इस समय वर्तमान और आगे होनेवाले
सभी भूत सदा विद्यमान रहते हैं